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सरकारी दफ्तरों और कोर्ट परिसर के शौचालयों की बदहाली पर उठे सवाल::

ट्रांसजेंडर और महिला शौचालय पर लटका मिला ताला, नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने डीएम, एसएसपी, तहसीलदार व जिला जज को भेजा पत्र, जल्द कार्रवाई की मांग.....(पढ़िए खबर)

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क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार जिले के सरकारी कार्यालयों और न्यायालय परिसर के शौचालयों की बदहाल व्यवस्था को लेकर नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जिला प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

पत्र

ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत ने हरिद्वार जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, उत्तराखंड के रजिस्ट्रार जनरल तथा हरिद्वार के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र भेजकर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि कई सरकारी कार्यालयों और कोर्ट परिसर के शौचालयों में नियमित सफाई नहीं हो रही है, जिससे गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना हुआ है। ट्रस्ट ने यह भी दावा किया है कि एसएसपी कार्यालय परिसर का सार्वजनिक शौचालय आम लोगों के उपयोग के बजाय स्टोर रूम और डस्टबिन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बनाए गए अलग शौचालय पर ताला लटका मिला। ट्रस्ट का कहना है कि जब विशेष वर्ग के लिए बनाई गई सुविधा उपयोग के लिए उपलब्ध ही नहीं होगी, तो उसके निर्माण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने सभी सरकारी परिसरों में स्वच्छ, सुरक्षित और सभी वर्गों के लिए सुलभ शौचालय उपलब्ध कराने की मांग की है।

विधि सेवा संस्थान के निदेशक और लॉ एण्ड जस्टिस सोसायटी के सदस्य कृष्णकांत: फोटो

कृष्णकांत ने कहा कि सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम नागरिक अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट जनहित में कानूनी और लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। उनका कहना है कि स्वच्छ शौचालय केवल सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक के सम्मान, स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है।

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