
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) एक तरफ सिंचाई विभाग अपनी जमीन और संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर उसकी ही दुकानों में कथित तौर पर बिना अनुमति निर्माण की शिकायत सामने आने से विभागीय निगरानी व्यवस्था कठघरे में खड़ी हो गई है।
मामला रुड़की क्षेत्र का है जहां पर कांवड़ यात्रा के दौरान भीड़ और अधिकारियों की व्यस्तता के बीच नहर किनारे सिंचाई विभाग की भूमि पर बनी दुकानों में कथित तौर पर बिना विभागीय अनुमति निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास विभाग की दुकानों के मूल स्वरूप और क्षेत्रफल में बदलाव कर निर्माण कराया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कांवड़ यात्रा के दौरान अधिकारियों की व्यस्तता का फायदा उठाकर कुछ दुकान संचालकों ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया। स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले में कुछ विभागीय कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। वही मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या निर्माण के लिए विभागीय अनुमति ली गई थी? अगर नहीं, तो निर्माण कैसे शुरू हो गया? विभागीय अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? क्या कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है?
सबसे अहम सवाल यह है कि जब सिंचाई विभाग अपनी संपत्तियों और जमीन को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कार्रवाई की बात करता है, तो उसकी ही दुकानों में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कैसे हो रही है?




