क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) मेहंदी-डोरी की रस्म के साथ दरगाह साबिर पाक का सालाना उर्स/मेला शुरू हो चुका है। उर्स के आगाज के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से अकीदतमंद जायरीनों के कलियर पहुंचने का सिलसिला भी तेज हो गया है।
दरगाह की चौखट पर हाजिरी और दुआ की चाह लेकर पहुंच रहे जायरीनों की भीड़ लगातार बढ़ रही है, लेकिन कलियर पहुंचने वाला मुख्य मार्ग व्यवस्थाओं की हकीकत बयां करता नजर आ रहा है।
दरगाह साबिर पाक के उर्स को लेकर पहले से तैयारियों पूरी करने का दावा किया जा रहा है लेकिन वर्तमान स्थिति उससे कई गुना दूर हैं।
हाल में ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री खजान दास और स्थानीय विधायक फुरकान अहमद ने उर्स की तैयारियों को परखा। लेकिन उनकी नजर मुख्य मार्गों पर नहीं पड़ी।
कोर कॉलेज से कलियर तक की सड़क पर कदम-कदम पर मुश्किलें हैं। कहीं सड़क उखड़ी पड़ी है तो कहीं गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। बारिश के बाद हालात और विकट हो गए हैं। सड़क पर जगह-जगह जलभराव और कीचड़ जमा है।
ऐसे में वाहन चालकों के साथ पैदल गुजरने वाले जायरीनों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।विडंबना यह है कि उर्स जैसे बड़े आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। व्यवस्थाओं को लेकर मंथन हुआ, जिम्मेदारियां तय हुईं और तैयारियों के दावे भी किए गए।
लेकिन जमीन पर तस्वीर अभी भी सवाल खड़े कर रही है। आखिर जब उर्स का आगाज हो चुका हैं और लाखों जायरीनों की आमद होनी बाकी है, तो मुख्य मार्ग की बदहाली को समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया? साबिर पाक की नगरी में पहुंचने वाले जायरीनों का इस्तकबाल जहां बेहतर व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और सुगम रास्तों से होना चाहिए था, वहीं उन्हें टूटी सड़क, गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलभराव से होकर गुजरना पड़ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ स्थानीय व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि उर्स की तैयारियों को लेकर किए गए दावों की भी परीक्षा ले रही है।








