“आयरन लेडी अनीता भारती” के नाम से कांप जाते थे नशा तस्कर: बिना रुके-थके दिन-रात तस्करों की कमर तोड़ती थी “ड्रग्स इंस्पेक्टर भारती”
हरिद्वार को "उड़ता पंजाब" बनने से बचाने वाली "लेडी सिंघम" ने बेदाग की 15 सालों तक नौकरी, सवाल? क्या अब हरिद्वार से खत्म हो गया नशा?.....(पढ़िए खबर)

क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार की तत्कालीन “आयरन लेडी” के नाम से चर्चित ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती अपने कार्य के प्रति निडर और संवेदनशील थी, जिसके चलते हुए नशा तस्करों में हड़कंप मचा हुआ था।

लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब जिलेभर के अधिकांश गाली-मोहल्ले, गांव ओर शहर धीरे-धीरे नशे के जाल में फंसता जा रहा थे। मेडिकल स्टोर से लेकर गुपचुप चल रही नकली दवाइयों की फैक्ट्रियों तक, हर जगह एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

तभी इस अंधेरे के बीच एक नाम चमका “ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती”, जिन्हें लोग आज भी “आयरन लेडी” और “लेडी सिंघम” के नाम से याद करते हैं।
देहरादून, ऋषिकेश समेत अन्य जिलों में करीब 15 वर्षों तक अपने बेदाग कार्यकाल में अनीता भारती ने जिस सख्ती और ईमानदारी के साथ काम किया।![]()
उन्होंने नशा तस्करों की नींद उड़ा दी थी। दिन हो या रात, छुट्टी हो या त्योहार उनकी कार्रवाई कभी नहीं रुकी। नकली दवाओं के बड़े-बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करना हो या मेडिकल स्टोर पर अवैध रूप से बिक रही नशीली दवाओं पर लगाम कसनी हो, भारती हर मोर्चे पर डटी रहीं।![]()
कार्यवाही की जद में आए नशा तस्कर की आंखों में ड्रग्स इंस्पेक्टर भारती चुभती थी। उनकी छापेमारी से तस्करों में खौफ फैल जाता था। कई बड़े गिरोहों का नेटवर्क उन्होंने तोड़ दिया और दर्जनों तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।![]()
उन्होंने नशा मुक्ति जागरूकता अभियान को भी धार दी, और नशे के प्रति जागरूक करने के लिए टीम का गठन भी किया था।
सूत्र बताते हैं कि उस समय हरिद्वार में नशे का कारोबार लगभग घुटनों पर आ चुका था। शहर को “उड़ता पंजाब” बनने से बचाने में उनका योगदान निर्णायक माना जाता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…..
जैसे-जैसे भारती की सख्ती बढ़ी, वैसे-वैसे तस्करों की बेचैनी भी। सूत्रों के अनुसार, नशा माफियाओं ने उनके खिलाफ साजिश रचनी शुरू कर दी। योजनाबद्ध तरीके से उन्हें फंसाने की कोशिशें हुईं।
“लालनटॉप सूत्र” यह भी दावा करते हैं कि पहले एक बड़ी चाल चली गई, लेकिन वह नाकाम रही। इसके बाद दोबारा प्लान बनाया गया और आखिरकार ऐसा जाल बिछाया गया कि अनीता भारती को विभागीय कार्यवाही का सामना करना पड़ा।
यहीं से हरिद्वार की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी…
तत्कालीन ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती की सख्ती से जिलेभर में नशे पर किसी हद तक अंकुश लगा पाया था,आरोप-प्रत्यारोप के बाद उनको विभागीय कार्यालय के समृद्ध कर दिया गया था।

ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती के विभागीय कार्यालय के समृद्ध होने के करीब 2 महीने बाद भी जिले में छुटपुट कार्यवाही को छोड़कर कोई बड़ी कार्यवाही देखने को नहीं मिली हैं।
जिसके चलते अब सवाल उठने लगे क्या एक सख्त अफसर के हटते ही सिस्टम कमजोर पड़ गया? क्या तस्करों को फिर से खुला मैदान मिल गया? तत्कालीन ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती के दौर में लगातार कार्यवाही की खबरें प्रकाशित होती थी, जिसने अकेले दम पर पूरे सिस्टम को हिला दिया था।

लेकिन सवाल यह भी है कि अब जिलेभर से नशा तस्करों को लेकर कोई बड़ी कार्यवाही की खबर सामने क्यों नहीं आती हैं। जिन मेडिकल संचालकों पर कार्यवाही हुई थी, वो अब दोबारा से कैसे खुलने शुरू हो गए हैं। अब देखना यह है? कि क्या प्रशासन फिर वैसी ही सख्ती दिखा पाएगा, या हरिद्वार को एक बार फिर नशे के साए में जीना पड़ेगा। यह आने वाला समय तय करेगा।



