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दरगाह साबिर पाक का परिसर बना तालाब::

बारिश ने खोली दरगाह प्रबंधन की तैयारियों की पोल, जलभराव से अकीदतमंदों में भारी नाराज़गी...(देखिए वीडियो)

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क्लिक उत्तराखंड: (बुरहान राजपूत) पिरान कलियर स्थित हज़रत साबिर पाक दरगाह में देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने दरगाह प्रबंधन की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। लगातार हुई बारिश के बाद दरगाह परिसर और आसपास के बाजारों की सड़कें पानी से लबालब भर गईं।

दरगाह साबिर पाक में भरा पानी

सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि बारिश का गंदा पानी सीधे दरगाह परिसर के अंदर तक पहुंच गया, जिससे ज़ियारत के लिए आए अकीदतमंदों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों में नाराज़गी साफ दिखाई दी।

अकीदतमंदों का आरोप है कि यदि दरगाह प्रशासन समय रहते परिसर के आसपास बने नालों की सफाई करा देता और अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करता, तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई असर दिखाई नहीं देता।

स्थानीय लोगों के अनुसार दरगाह के आसपास बने अधिकांश नाले या तो गंदगी से पूरी तरह जाम पड़े हैं या फिर उन पर अतिक्रमण हो चुका है। 2022 में भी इसी तरह दरगाह परिसर में गंदा पानी भर गया था, लेकिन उस समय से आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसी कारण बारिश का पानी निकासी का रास्ता नहीं मिलने से सीधे दरगाह परिसर और मुख्य मार्गों पर भर गया। इससे श्रद्धालुओं, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जलभराव के दौरान व्यवस्था संभालने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर नजर नहीं आए, जिससे लोगों में और अधिक नाराज़गी देखने को मिली। अकीदतमंदों का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर ऐसी लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती।

साहिबजादा शाह यावर मियां

सज्जादा परिवार के शाह यावर मिया एजाज साबरी ने भी दरगाह परिसर में बारिश का गंदा पानी पहुंचने पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि दरगाह प्रशासन को जल निकासी की व्यवस्था स्थायी रूप से मजबूत करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पहले नालों की नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाने और आधुनिक ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। दरगाह प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाएं फेल साबित हुई हैं।

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