क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार के मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में हुए बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पुलिस की गहन विवेचना ने पूरी कहानी को उलटकर रख दिया। जिन लोगों को हत्या का आरोपी बनाकर कानून के शिकंजे में फंसाने की कोशिश की गई थी, वे जांच में पूरी तरह निर्दोष निकले। वहीं, मृतक के सबसे करीबी दोस्त ही इस पूरे घटनाक्रम के असली किरदार बनकर सामने आए।

पुलिस के मुताबिक, 11 जुलाई की रात सौरभ अपने तीन साथियों के साथ पुरानी रंजिश के चलते विरोधियों से भिड़ने की तैयारी में था। उसके पास 12 बोर का अवैध तमंचा था। बताया गया कि हथियार को परखने और चलाने के दौरान अचानक ट्रिगर दब गया और गोली सीधे सौरभ को जा लगी। घायल सौरभ को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस पूरे मामले का खुलासा एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, क्षेत्राधिकारी मंगलौर और प्रभारी निरीक्षक भगवान मेहर के नेतृत्व में गठित टीम ने किया।

घटना के बाद घबराए साथियों ने अपनी गलती छिपाने और पुरानी दुश्मनी का फायदा उठाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। उन्होंने अनुज, रॉबिन और प्रदुमन पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, ताकि निर्दोष लोग हत्या के मुकदमे में फंस जाएं और असली सच्चाई हमेशा के लिए दफन हो जाए।

लेकिन मंगलौर पुलिस ने जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय हर पहलू की वैज्ञानिक तरीके से जांच की। घटनास्थल की फॉरेंसिक पड़ताल, 112 पर की गई कॉल का विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने झूठी कहानी की एक-एक परत खोल दी। आखिरकार पुलिस उस सच तक पहुंच गई, जिसे छिपाने की हर संभव कोशिश की गई थी।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सुमित पुत्र सुखबीर निवासी शकरपुर (पुरकाजी), डिम्पल पुत्र नाहर और आशीष पुत्र बिंदर निवासी मोहम्मदपुर जट्ट को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 12 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस भी बरामद कर लिया गया।

पुलिस ने विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर हत्या की धारा में संशोधन करते हुए गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की और तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि तकनीकी साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच पर भरोसा न किया जाता, तो तीन निर्दोष लोग एक ऐसे अपराध में फंस जाते, जो उन्होंने किया ही नहीं था।



