
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सूफी संतों की नगरी पिरान कलियर स्थित खानकाह-ए-फैजान वाहिद में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शहीदाने कर्बला की याद में एक रूहानी व अकीदतमंदाना महफिल का आयोजन किया गया। महफिल में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और कर्बला के महान संदेश को अपनी ज़िंदगी में अपनाने का संकल्प लिया।
महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन-ए-पाक से हुई, जिसके बाद नोहखानी और कर्बला की याद में तकरीरें पेश की गईं। राव भूरा बढ़ेड़ी, काजी अकरम नैनोतवी, आमिर रुड़की, सैय्यद आदिल हुसैन शेखपुरा कदीम,मोईन, मेहरबान, गुलाम हुसैन कलियर समेत अन्य लोगों ने इमाम हुसैन की याद में नोहाखानी की।

खानकाह के गद्दीनशीन सैय्यद फरीद आलम साबरी ने कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर डटे रहने की सबसे बड़ी मिसाल है। हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने परिवार और साथियों के साथ जो कुर्बानी दी, वह पूरी इंसानियत के लिए हमेशा एक रोशन चराग़ बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक ज़रूरत इमाम हुसैन की सीरत और उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की है। अगर इंसान सच्चाई, ईमानदारी, भाईचारे और इंसाफ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना ले, तो समाज से नफरत, जुल्म और बुराइयों का खात्मा हो सकता है। कर्बला हमें यह संदेश देती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, हक़ और सच्चाई का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। महफिल के दौरान अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की बारगाह में सलाम पेश किया तथा मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआएं की गईं। महफिल का माहौल पूरी तरह रूहानियत और अकीदत से सराबोर रहा, जहां मौजूद हर शख्स की आंखें कर्बला की कुर्बानियों को याद कर नम हो उठीं। कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया। इस दौरान सैय्यद वाशिफ मियां, सैय्यद कैफ जैदी, शाह खालिक मियां, राव अफाक, राव अबरार, राव सफ़ाअत, राव फरमान,राव सैफ अली, डॉ तहसीम,मेहरबान, कालू खान, फिरोज साबरी, मेहराज खान, अनीश, गुलफराज, गुफरान, जाबिर समेत अन्य मौजूद रहें



