
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के घोटाले ने अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दरवाजे तक दस्तक दे दी है। हरिद्वार में दर्ज मुकदमे में नामजद 19 शिक्षण संस्थानों की वित्तीय गतिविधियों की जांच की मांग उठाते हुए नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत ने ED मुख्यालय को विस्तृत पत्र भेजा है।
उन्होंने मामले को केवल छात्रवृत्ति की रकम के कथित गबन तक सीमित न रखते हुए इसके पीछे संभावित वित्तीय नेटवर्क और पुराने घोटाले से जुड़े तारों की भी पड़ताल करने की मांग की है।
मामला शैक्षणिक सत्र 2021-22 और 2022-23 में अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए जारी सरकारी छात्रवृत्ति में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस संबंध में हरिद्वार के सिडकुल थाने में एफआईआर दर्ज है। कृष्णकांत ने पत्र में सवाल उठाया है कि कहीं छात्रवृत्ति योजनाओं में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के पीछे कोई साझा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं रहा।
पुराने घोटाले से संबंधों की जांच पर जोर…..
पत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रवृत्ति घोटाले का भी उल्लेख किया गया है। कृष्णकांत के मुताबिक, इस पुराने मामले में ED करीब 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा एफआईआर में शामिल कुछ शिक्षण संस्थानों पर पहले के मामले में भी संलिप्तता के आरोप रहे हैं। ऐसे में दोनों मामलों के बीच संभावित आर्थिक संबंधों की जांच जरूरी है।
बैंक खातों से लेकर असली लाभार्थियों तक उठाए सवाल…..
कृष्णकांत ने ED से संबंधित संस्थानों के बैंक खातों की चल-अचल संपत्तियों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और धन के वास्तविक लाभार्थियों की पड़ताल करने की मांग की है। साथ ही सरकारी अधिकारियों की संभावित मिलीभगत और धनशोधन के पहलू की भी जांच किए जाने का मुद्दा उठाया है।
उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति की रकम में गड़बड़ी का सवाल केवल सरकारी खजाने के नुकसान का नहीं है, बल्कि उन पात्र विद्यार्थियों के अधिकारों का भी है, जिनके लिए यह सहायता निर्धारित की गई है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पत्र के आधार पर संबंधित एजेंसी क्या कदम उठाती है और जांच में पुराने तथा मौजूदा मामलों के बीच कोई वित्तीय संबंध सामने आता है या नहीं। फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित आरोपियों का पक्ष सामने आना बाकी है।



