
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार जिले में संवेदनशील क्षेत्रों के निकट संचालित शराब की दुकानों के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित अनुज्ञापियों, आबकारी विभाग के अधिकारियों एवं अन्य हितधारकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत भी शामिल हुए और उन्होंने शराब की दुकानों के संचालन से जुड़े शासनादेश की वैधता पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए।

बैठक के दौरान कृष्णकांत ने जिलाधिकारी और आबकारी विभाग के अधिकारियों को बताया कि जनपद हरिद्वार सहित पूरे उत्तराखंड में शराब की दुकानों का संचालन जिस शासनादेश के आधार पर किया जा रहा है, उसके अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि वह शासनादेश चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश में शराब की दुकानों के संचालन से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि उक्त शासनादेश में कहीं भी उत्तराखंड राज्य का उल्लेख नहीं है और न ही आबकारी विभाग की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि चंडीगढ़ से संबंधित प्रावधानों को विधिवत उत्तराखंड में लागू किया गया है।
कृष्णकांत का कहना था कि उच्चतम न्यायालय का संबंधित निर्णय केवल चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश तक सीमित है और उसका उत्तराखंड राज्य पर स्वतः कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में किसी अन्य राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित शासनादेश के आधार पर उत्तराखंड में शराब की दुकानों का संचालन प्रथम दृष्टया मनमाना और विधि-विरुद्ध प्रतीत होता है।उन्होंने बैठक में स्पष्ट किया कि इस संबंध में जिलाधिकारी हरिद्वार को विधिक स्थिति से अवगत करा दिया गया है। यदि इस मामले में विधि सम्मत कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संबंधित शासनादेश को न्यायिक समीक्षा के लिए माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाएगी।



