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हरिद्वार में बदहाल शौचालयों पर हाईकोर्ट सख्त:

डीएम समेत राज्य सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब, नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की जनहित याचिका पर हुई सुनवाई......(पढ़िए खबर)

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क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार के सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर शौचालयों की बदहाल व्यवस्था अब उत्तराखंड हाईकोर्ट की निगरानी में आ गई है।

इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जिलाधिकारी हरिद्वार, राज्य सरकार और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

विधि सेवा संस्थान के निदेशक और लॉ एण्ड जस्टिस सोसायटी के सदस्य कृष्णकांत: फोटो

यह जनहित याचिका नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ कृष्ण कांत की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिला न्यायालय, जिलाधिकारी कार्यालय, तहसील, एसएसपी कार्यालय समेत कई सरकारी परिसरों में शौचालय या तो अत्यंत जर्जर हालत में हैं।

या फिर उपयोग योग्य होने के बावजूद उन पर ताले लगे रहते हैं। इससे आम नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विशेष रूप से जिलाधिकारी हरिद्वार से यह स्पष्ट करने को कहा कि जनवरी 2025 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘राजीव कलिटा बनाम केंद्र सरकार’ मामले में जारी दिशा-निर्देशों का जनपद में कितना पालन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी सार्वजनिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुचारु शौचालय उपलब्ध कराने, जिनमें बिजली, पानी, फ्लश और नियमित सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित हों, के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर सार्वजनिक महत्व का मानते हुए इसकी अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 तय की है।

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