
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) उत्तराखंड के चर्चित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की गूंज अब सिर्फ जांच एजेंसियों के दफ्तरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी आंच प्रदेश की राजनीति तक पहुंच गई है।
रुड़की और पिरान कलियर क्षेत्र के दो भाजपा नेताओं से जुड़े शिक्षण संस्थानों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि भाजपा की ओर से अब तक टिकट या संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले की रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है और घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। भाजपा भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लेकर सख्त संदेश देने के मूड में दिखाई दे रही है।
पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और चुनाव प्रचार जैसी जिम्मेदारियों पर इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इधर जांच एजेंसियां दोनों शिक्षण संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल में जुटी हैं।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक चर्चाएं भी तेज होती जा रही हैं। विपक्ष भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इसे आगामी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है।



