
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) नकली नोटों की चमक से असली बाजार को धोखा देने वाले गिरोह को शायद यह अंदाजा नहीं था कि हरिद्वार पुलिस उनके पीछे सिर्फ सुराग नहीं, बल्कि पूरा सच तलाश रही है।
चार आरोपियों की गिरफ्तारी से शुरू हुई जांच आखिरकार पंजाब पहुंची और वहां जाकर उस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जो कारोबार की आड़ में देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की साजिश रच रहा था।

एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में नगर कोतवाली पुलिस ने ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसने नकली करेंसी गैंग की जड़ों को हिला दिया। जेल भेजे गए आरोपियों से पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ ने ऐसे राज खोले कि पुलिस बिना समय गंवाए पंजाब रवाना हो गई। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और सटीक रणनीति के बाद पुलिस ने गिरोह के दो अहम चेहरों को दबोच लिया।
एक ओर ढाबे की रसोई में रोटियां सिक रही थीं, तो दूसरी ओर उसी आड़ में नकली नोटों का खेल चल रहा था। वहीं दूसरा आरोपी कपड़ों के कारोबार की ओट में जाली करेंसी का जाल बुन रहा था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 1 लाख 10 हजार रुपये के नकली नोट, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर और एक वरना कार बरामद की।
पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। दोनों आरोपियों की मुलाकात किसी बाजार या कारोबार में नहीं, बल्कि जेल की सलाखों के पीछे हुई थी। जहां पर सुखबीर पहले बैंक फ्रॉड और जाली करेंसी के मामलों में जेल जा चुका है, जबकि पवन एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे में जेल की हवा खा चुका है। सलाखों के पीछे हुई यही दोस्ती बाद में नकली नोटों के कारोबार में बदल गई। जिसमें असली 50 हजार रुपये लेकर बदले में 1 लाख रुपये की नकली करेंसी सप्लाई की जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य पहले बैंक फ्रॉड और जाली करेंसी के मामलों में जेल जा चुका है, जबकि दूसरा एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे में सजा काट चुका है। अपराध की दुनिया के इन पुराने खिलाड़ियों ने जेल से बाहर आते ही फिर वही रास्ता चुना, लेकिन इस बार हरिद्वार पुलिस उनके लिए सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गई। यह कार्रवाई सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस अंतरराज्यीय नेटवर्क पर बड़ा प्रहार है, जो नकली नोटों के जरिए बाजार और आम लोगों को चूना लगाने की फिराक में था। हरिद्वार से पंजाब तक पहुंची इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि अपराधी चाहे कितनी भी दूर छिप जाएं, यदि पुलिस की नीयत और रणनीति मजबूत हो तो कानून की पकड़ से बचना नामुमकिन है।
पुलिस टीम….
- प्रभारी निरीक्षक कुन्दन सिंह राणा
- उप निरीक्षक ऋषिकांत पटवाल
- हेड कांस्टेबल संजय पाल
- हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल
- कांस्टेबल सुनील चौहान
- कांस्टेबल अजीत तोमर



