
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सीएजी की रिपोर्ट ने रेलवे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में निरीक्षण किए गए रेलवे स्टेशनों में सिर्फ 11 फीसदी स्टेशन ही तय मानकों पर खरे उतरे।
जबकि 89 फीसदी स्टेशनों पर किसी न किसी तरह की कमी सामने आई। रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात पेयजल को लेकर सामने आई है। कई स्टेशनों के वाटर कूलरों और जलापूर्ति व्यवस्था की जांच में ई-कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए।
इससे यात्रियों को दूषित पानी मिलने और उनके स्वास्थ्य पर खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है। सीएजी ने रेलवे के विभिन्न जोनों के 512 स्टेशनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह जरूरी यात्री सुविधाएं अधूरी मिलीं। पेयजल स्रोतों की नियमित जांच और जलापूर्ति व्यवस्था में भी खामियां सामने आईं।
उत्तराखंड में भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट में हरिद्वार और लक्सर रेलवे स्टेशन की जांच का उल्लेख है। लक्सर स्टेशन पर न्यूनतम यात्री सुविधाओं की कमी, जबकि हरिद्वार स्टेशन पर वाटर कूलरों के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए नेशनल पब्लिक ट्रस्ट ने हस्तक्षेप किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत ने उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर प्रदेश के सभी रेलवे स्टेशनों का संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है।
साथ ही सभी पेयजल स्रोतों की वैज्ञानिक जांच कराकर यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। अब सवाल यह है कि जब रेलवे स्टेशन यात्रियों की सुविधा का प्रमुख केंद्र हैं, तो वहां पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा में इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हुई?



