
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद पाक के 758वें सालाना उर्स के मुबारक मौके पर जुमेरात का दिन अकीदत, रूहानियत और जज्बात से लबरेज रहा। सुबह करीब 10:30 बजे उर्स की सबसे बड़ी और अहम रस्म कुल शरीफ अदा की गई।
कुल शरीफ के दौरान दरगाह साबिर पाक का पूरा माहौल रूहानी हो गया। दरगाह परिसर में जगह कम पड़ी तो अकीदतमंद बाजारों, गलियों और सड़कों तक फैल गए। जिस जायरीन को जहां जगह मिली, वहीं खड़े होकर कुल शरीफ में शरीक हुआ।
महफिल खाने में सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज साबरी ने कुल शरीफ की रस्म अदा कराई। इस दौरान हजरत साबिर पाक का सजरा शरीफ पढ़ा गया। सजरा शरीफ और दुआ के दौरान अकीदतमंदों की आंखों से आंसू छलक पड़े। हजारों जायरीन ने हाथ उठाकर अपने और अपने परिवार की सलामती के साथ मुल्क की तरक्की, खुशहाली, अमन-ओ-अमान और आपसी भाईचारे के लिए दुआएं मांगीं।
कुल शरीफ के दौरान साबिर पाक के दीवानों की अकीदत का ऐसा मंजर दिखाई दिया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। कोई हाथ उठाकर दुआ में मशगूल था तो कोई आंखें बंद कर आंसुओं के साथ अपनी फरियाद दरबारे साबरी में पेश कर रहा था। दरगाह परिसर से लेकर आसपास के बाजारों और सड़कों तक हर तरफ दुआओं की सदाएं सुनाई दे रही थीं।
देशभर के लिए मांगी गई दुआ…….
कुल शरीफ के बाद दुआ-ए-खैर की गई। इस दौरान मुल्क में अमन-ओ-अमान और खुशहाली के साथ लोगों की सलामती और मुश्किलात दूर होने के लिए भी खुसूसी दुआ मांगी गई। सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी, साहिबजादा शाह यावर मियां और हाफिज सऊद साबरी ने तमाम जायरीनों के साथ मिलकर मुल्क और पूरी इंसानियत के लिए दुआ की। इसके बाद महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ। मुख्तलिफ राज्यों से पहुंचे कव्वालों ने अपने कलाम पेश कर समां बांध दिया। कव्वाली और रूहानी कलाम के दौरान भी जायरीनों की अकीदत देखते ही बनी। इस मौके पर साबरी सज्जादा नशीन खानदान की ओर से साहिबजादा शाह यावर मियां, सज्जादा नशीन के नुमाइंदे शाह सुहैल, नोमी मियां, शाह काशिफ ऐजाज साबरी, शाह खालिक, शाह यावर अली, मुनव्वर अली साबरी समेत कई लोग मौजूद रहे।



