क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) ज्वालापुर के एक प्रतिष्ठित कार बाजार में हुए एक वाहन सौदे को लेकर अब पीड़ित ने जीएसटी विभाग का दरवाजा खटखटाया है। मामला करीब 20 लाख 11 हजार रुपये की रकम और लंबे समय से लंबित जीएसटी बिल से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत में व्यवसायी के कारोबार और कर संबंधी रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
शिकायत के मुताबिक, मार्च 2026 में एक वाहन की खरीद के लिए खरीदार से कुल 20 लाख 11 हजार रुपये लिए गए। इनमें 20 लाख प्रतिष्ठित कार बाजार के बैंक खाते में जमा किए जाने और बाकी 11 हजार ऑनलाइन यूपीआई के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई है।
आरोप है कि सौदे के समय खरीदार को भरोसा दिलाया गया था कि वाहन का पंजीकरण हस्तांतरण पूरा होने के बाद जीएसटी बिल उपलब्ध करा दिया जाएगा। लेकिन करीब पांच महीने गुजरने के बाद भी न तो पंजीकरण हस्तांतरण पूरा हुआ और न ही जीएसटी बिल मिलने का दावा किया गया।
इसके बाद मामले को जीएसटी विभाग तक पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि प्रतिष्ठित कार बाजार के केवल इस सौदे की ही नहीं, बल्कि पूरे कारोबार की जांच की जाए। इसमें वाहन खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, बैंक खातों में जमा रकम, जीएसटी रिटर्न और आयकर से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करने की मांग की गई है।
मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि फर्म के खाते में लाखों रुपये पहुंचने के बावजूद जीएसटी बिल जारी क्यों नहीं हुआ?



