
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार जिले में निवर्तमान जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अतुल प्रताप सिंह पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और तानाशाही कार्यशैली के गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा नेता ने मामले की उच्चस्तरीय SIT/विजलेंस टीम से जांच की मांग की है।

आरोप है कि उनके पद पर रहते हुए पंचायतों के विकास कार्यों के लिए जारी होने वाले बजट को जानबूझकर रोका गया, जिससे कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।
भाजपा नेता सुशील त्यागी ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में विभागीय नियमों को ताक पर रखकर चहेते अधिकारियों और कर्मचारियों को मनचाही तैनाती दी गई है, जबकि पात्र कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में पारदर्शिता के बजाय मनमानी और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है, जिससे कर्मचारियों में भय का माहौल बनाया गया। जिसके कारण विभागीय अधिकारी उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा पाए।

वही भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि डीपीआरओ अतुल प्रताप ने पिछले कई वर्षों से CR को जानबूझकर लंबित रखा गया। जिसका बंधक बनाने का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को ब्लैकमेल करना और पदोन्नति के अवसरों को नष्ट करने का गंभीर आरोप लगाया हैं।

उन्होंने कहा कि DPRO का रवैया पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण हो गया है। पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और विकास कार्यों में अनावश्यक बाधाएं खड़ी की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित हुई है और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष SIT/विजलेंस टीम से जांच कराई जाए, ताकि बजट आवंटन, तबादलों और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े सभी तथ्यों को जनता के सामने लाया जा सके। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। और निलंबन की कार्यवाही अमल में लाई जाए। मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।



