
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सार्वजनिक सुविधाओं की बदहाल व्यवस्था को लेकर उठी एक जनहित की आवाज़ अब बदलाव की तस्वीर पेश करने लगी है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत की पहल और उत्तराखंड उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय, हरिद्वार परिसर में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया गया है।

ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्णकांत ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले जिलाधिकारी कार्यालय, जिला न्यायालय, तहसील हरिद्वार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित विभिन्न सरकारी परिसरों का निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान कई सार्वजनिक शौचालय या तो जर्जर हालत में मिले या उन पर ताले लटके हुए थे। अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन जब कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो मामला जनहित में उत्तराखंड उच्च न्यायालय तक पहुंचाया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला प्रशासन से दो हफ्ते का समय देते हुए जवाब मांगा और सार्वजनिक शौचालयों को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए।
शुक्रवार को दोबारा निरीक्षण के दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शौचालयों के निर्माण एवं मरम्मत का कार्य शुरू मिला। कृष्णकांत ने इसे न्यायपालिका की सक्रियता और जनहित की जीत बताते हुए कहा कि उम्मीद है अब अन्य सरकारी कार्यालयों में भी सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से काम होगा।



