क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने की साजिश रच रहे एक हाईटेक जाली नोट गिरोह का हरिद्वार पुलिस ने सनसनीखेज़ खुलासा किया है। श्यामपुर पुलिस ने ऐसी नकली करेंसी फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।
जहां आधुनिक तकनीक, लैपटॉप, हाई-क्वालिटी प्रिंटर और विशेष वॉटरमार्क वाले कागज की मदद से 500-500 रुपये के नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 50 हजार रुपये के छपे हुए जाली नोट, एक लैपटॉप, दो प्रिंटर, पांच मोबाइल फोन, विशेष शीट और अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 27 जून को पुलिस ने 52,500 रुपये के नकली नोटों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। इसी दौरान सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य कार में नकली नोट छापने की मशीनें और अन्य सामान लेकर बिजनौर की ओर भाग रहे हैं।
सूचना मिलते ही प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक एवं प्रभारी कोतवाली श्यामपुर अवनी तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लालढांग तिराहे पर घेराबंदी कर आरोपियों को धर दबोचा।तलाशी के दौरान पुलिस के होश उड़ गए। मौके से बरामद 25 शीटों पर लगभग 50 हजार रुपये के 500-500 के नकली नोट छपे मिले, जिनकी कटिंग अभी बाकी थी। इसके अलावा गांधीजी के वॉटरमार्क वाली विशेष शीट भी मिली, जिससे साफ हो गया कि आरोपी नकली नोटों को हूबहू असली जैसा बनाने की तैयारी कर रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बड़ा राज खोला। गिरोह का सदस्य गुलजार ऑनलाइन विशेष कागज मंगाता था, जबकि शगुन असली नोटों की हाई-रेजोल्यूशन फोटो लेकर सॉफ्टवेयर और एडिटिंग एप के जरिए उन्हें असली जैसा तैयार करता था। इसके बाद हाई-क्वालिटी प्रिंटर से नोटों की छपाई होती थी। मुख्य आरोपी देवेंद्र ने कबूल किया कि इससे पहले भी वह और गुलजार करीब एक लाख रुपये के नकली नोट तैयार कर चुके हैं, जिनमें से 60 हजार रुपये की फर्जी करेंसी बाजार में खपा दी गई थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवेंद्र कुमार, गुलजार अहमद और शगुन जोशी के रूप में हुई है। पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क, नकली नोट खरीदने वालों और बाजार में खपाई गई फर्जी करेंसी की जांच में जुटी है। माना जा रहा है कि इस गैंग के तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।



