
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सूफी संतों की नगरी पिरान कलियर में जब कोई अकीदतमंद आस्था के साथ दरगाह में हाजिरी लगता है, तो मान्यता हैं। उसकी झोली खाली नहीं रहती है।
जिसके चलते हुए अकितदमंदो के अटूट विश्वास से प्रतिदिन हजारों जायरीन देश के कोने-कोने से अपनी आस्था लेकर पिरान कलियर पहुंचते हैं। अपनी अकीदत के साथ चढ़ावा पेश करते हैं और बेहतर व्यवस्थाओं की उम्मीद लेकर दरगाह परिसर में कदम रखते हैं।
लेकिन जमीनी तस्वीर कई बार इन उम्मीदों से उलट दिखाई देती है। सफाई, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था और यातायात जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लोगो कों लगा शायद दरगाह घाटे से चल रही है।
लेकिन नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के सचिव आरटीआई आवेदनकर्ता प्रियांशु कांम्बोज की ओर से मांगी गई जानकारी में 62,11,04,115.80 की रकम का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। करोड़ों की इस रकम ने अब एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। जब रकम का आंकड़ा इतना बड़ा है तो दरगाहों की व्यवस्थाएं अपेक्षा के मुताबिक बेहतर क्यों नहीं दिखाई देतीं?
हाल ही में दरगाह साबिर पाक का सालाना उर्स/मेला सम्पन्न हुआ हैं। लेकिन उर्स/मेले में लाखों रुपए का टेंडर करने बाद भी सफाई व्यवस्था जीरो रही। वही सड़के क्षतिग्रस्त रही। उनकी देखभाल करने वाले जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते रहे। इसके अलावा कई मूलभूत सुविधाओं से भी जायरीनों को वांछित रहना पड़ा, आपको बता दे कि दरगाह साबिर पाक, दरगाह इमाम साहब और दरगाह किलकिली साहब वक्फ बोर्ड के अधीन आती है। जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और वक्फ बोर्ड की होती है।
जायरीन और स्थानीय पूछ रहे……. करोड़ों हैं तो सुविधाएं कहां हैं?
नगर पंचायत पिरान कलियर के सभासद नाजिम त्यागी, नोमी मियां, सभासद प्रतिनिधि रशीद अली, मौसम अली, एडवोकेट शहजाद अली समेत अन्य लोगों ने “क्लिक उत्तराखंड न्यूज पोर्टल” की बातचीत में कहा कि आरटीआई में दरगाहों के पास करोड़ों की रकम का आंकड़ा सामने आया है। तो जायरीनों को असुविधा क्यों झेलनी पड़ रही है।
उर्स/मेले में जहां पर स्थाई समाधान होने चाहिए? वहां पर आज तक अस्थाई प्रथा क्यों संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि दरगाह का पैसा दरगाह में आने वाले जायरीनों के हित में खर्च होना चाहिए, ना कि उसकी बंदरबांट होनी चाहिए। उन्होंने कहा मूल भूत सुविधा के साथ-साथ दरगाह साबिर पाक के नाम से यूनिवर्सिटी कॉलेज भी बनाना चाहिए।



