
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार जिले की एक पुलिस चौकी में इन दिनों नई आमद ने मौसम का मिजाज ही बदल दिया है।
तबादला एक्सप्रेस से उतरकर “छोटे साहब” ने चौकी में कदम रखा तो मानो बधाई देने वालों के मोबाइल में भी अचानक नेटवर्क फुल हो गया। फोन गूंजने के साथ संदेश आए और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया।
चौकी की नई एंट्री के साथ ही कुछ “खास रसूखदारों चेहरों” की सक्रियता भी चर्चा में है। विभागीय गलियारों में कानाफूसी है कि इनमें कुछ छुटपुट राजनीतिक चेहरे और अवैध खनन के कारोबार से जुड़े लोग छोटे साहब की आमद पर अपनी खुशी का इजहार कर रहे है तो कोई बाकायदा फूलों के बुके लेकर छोटे साहब के दरबार में हाजिर हैं।
अवैध खनन में सक्रिय लोग छोटे साहब को अपने सगे भाई से भी ज्यादा करीबी मान रहे हैं। हालांकि कौन किस काम से मिला, किसने क्या कहा और मुलाकात में चाय कितनी मीठी थी. इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं है। लेकिन साहब की आमद ने चर्चाओं को जरूर चाय की तरह उबाल दिया है।
कोई कह रहा है, “भाई साहब, नई पोस्टिंग है, बधाई तो बनती है!” तो कोई कान में फुसफुसा रहा है “इतनी जल्दी पहचान कैसे हो गई?” कहानी सिर्फ चौकी तक सीमित नहीं है।
“छोटे साहब” की नई पारी शुरू होते ही “बड़े साहब कोतवाल” की ऊपर वाले कमरे की खिड़की भी जैसे सीधी कोतवाली से चौकी की तरफ खुल गई हो! आखिर नई एंट्री जो हुई है। चर्चा तो यहां तक है कि छोटे साहब के आने की खबर सुनकर बड़े कोतवाल साहब के चेहरे की गंभीरता भी थोड़ी नरम पड़ गई। नहीं तो बड़े साहब छोटी-छोटी बातों पर लाल हो जाते थे, लेकिन अब उनका गुस्सा नरम हैं. अब इसे महज संयोग कहें या महकमे की अंदरूनी खुशी यह तो बड़े साहब ही बेहतर जानते होंगे।
तबादला एक्सप्रेस में सवार होकर आए छोटे साहब की खुशी में “बड़े कोतवाल साहब” ने मूंछों को ताव दिया है, भले ही बड़े साहब मूंछे ना देखते हो, फिलहाल बड़े कोतवाल साहब का दिल भी बाग- बाग हैं।
देखना होगा कि “छोटे साहब”अपनी चौकी को जान पहचान से चलाते हैं, या फिर चौकी में कानून, निष्पक्षता और जवाबदेही की आवाज सबसे ऊंची सुनाई देती है या नहीं। यह तो आने वाला समय ही बताएगा?



