क्लिक उत्तराखंड:(बुरहान राजपूत) गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक परेड, मीडिया ट्रायल और सोशल मीडिया पर उनकी पहचान उजागर किए जाने के मुद्दे पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
राष्ट्रीय लोक सेवा संस्थान के अध्यक्ष कृष्णकांत के निर्देशन में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (IG Police) को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
जनहित याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद कई मामलों में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाया जाता है, मीडिया के सामने पेश किया जाता है तथा उनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए जाते हैं। याचिका के अनुसार, न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने से पहले इस प्रकार की कार्रवाई संविधान में प्रदत्त गरिमा, निजता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों के विपरीत है।
याचिका में पूरे उत्तराखंड में गिरफ्तारी की प्रक्रिया के लिए एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की मांग की गई है। साथ ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिए जाने, गिरफ्तार व्यक्तियों के नाम, फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा मीडिया ट्रायल और सार्वजनिक अपमान जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने की भी मांग उठाई गई है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए DGP और IG Police को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश को पुलिस सुधारों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



