
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) कलियर क्षेत्र इन दिनों खनन का गढ़ बनता जा रहा है। सड़कों पर फर्राटा भरते ओवरलोड डंपर अब सिर्फ वाहन नहीं, बल्कि चलती-फिरती मौत बन चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि खनन की आड़ में नियमों को खुलेआम रौंदा जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। जबकि कलियर में खनन के खिलाफ ग्रामीणों का लगातार गुस्सा फूट रहा हैं।
इससे पहले भी ग्रामीणों ने टायर लगाकर डंपरों को रोककर विरोध-प्रदर्शन किया था, इसके बावजूद भी प्रशासन इन पर कोई रोक नहीं लगा पाया, जिसके चलते हुए आशंका जताई जा रही है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
क्षेत्र में परमिशन की बाढ़? भीड़भाड़ वाले इलाके में बेखौफ दौड़ रहे ओवर लोड खनन से लदे वाहन…..
कलियर क्षेत्र में खनन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख एक के बाद एक कई परमिशनों की अनुमति दी हैं। जिसके चलते हुए कलियर क्षेत्र खनन का गढ़ बन चुका है।

खनन से लदे ओवरलोड वाहन बेखौफ होकर बेडपुर चौक से लेकर कोर कॉलेज तक मौत बनकर दौड़ रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर पाते। जिसके चलते बेखौफ खनन माफिया क्षेत्र में तांडव मचा रहे हैं। और परमिशन की आड में लगातार खनन का खेल जारी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि विभागीय अधिकारी और स्थानीय प्रशासन आँखे बंद कर तमाशा देख रहा हैं।
रुड़की एआरटीओ विभाग मौन?…

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अक्सर रुड़की एआरटीओ विभाग छोटे वाहनों पर बेरोकटोक धड़ल्ले से चालानी कार्यवाही करता हैं। लेकिन खनन माफियाओं के सामने एआरटीओ विभाग मौन साधे हुए है। क्या भारी वाहनों पर कार्रवाई से विभाग डरता है या फिर मिलीभगत का खेल चल रहा है?
आज फिर खनन को लेकर स्थानीय लोगों का हंगामा….
शुक्रवार को एक बार फिर खनन माफियाओं के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डंपरों में ओवरलोड मिट्टी भरकर लाई जा रही हैं।
जिसके चलते हुए सड़के क्षतिग्रस्त हो गई हैं। और डंपरों के कारण धूल उड़ाई जा रही हैं, आने-जाने वाले राहगीरों और छोटे वाहनों को काफी दिक्कतों का सामने करना पड़ रहा हैं।
आखिर कौन करेगा कार्यवाही?

वही सवाल उठने भी लाज़िम हैं कि जब प्रशासन ही अपनी आँखों पर पट्टी बांध लेता हैं, तो आम लोग किसके पास अपनी फ़रियाद/शिकायत लेकर जायेंगे? अब देखना होगा कि क्या प्रशासन खनन के खेल पर रोक लगा पाएगा? या फिर चेक पोस्ट और माइनिंग अधिकारियों के भरोसे ही नियमों को ताक रखा जायेगा। वो आने वाला समय बताएगा?
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