
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) उत्तराखंड में नीट-यूजी काउंसलिंग 2026 के दौरान स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के कथित दुरुपयोग का मामला अब हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जनहित याचिका दाखिल कर राज्य गठन से अब तक जारी ऐसे प्रमाणपत्रों और उनके आधार पर मिले लाभ की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
याचिका में दावा किया गया है कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के 24 अभ्यर्थियों में से 16 के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं। कहीं आवेदन का विवरण उपलब्ध नहीं मिला तो कहीं अभ्यर्थी के नाम और आवेदन में अंतर तथा प्रमाणपत्र की श्रेणी को लेकर विसंगतियां मिलने का आरोप है।
याचिकाकर्ता ने नीट काउंसलिंग के पहले चरण की 195 और दूसरे चरण की 329 प्रविष्टियों समेत कुल 524 रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। सवाल उन अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड पर भी उठाए गए हैं, जिन्होंने उत्तराखंड का मूल निवासी होने का दावा किया, जबकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई राज्य से बाहर की बताई गई है।
याचिका में सितंबर 2026 में दर्ज तीन एफआईआर और राजस्व निरीक्षक की शिकायत का हवाला देते हुए प्रमाणपत्र बनने से लेकर उसके सत्यापन और मेडिकल सीट आवंटन तक की पूरी कड़ी खंगालने की मांग की गई है।
मामले में एआई से तैयार तस्वीर के कथित इस्तेमाल और एमबीबीएस सीट के बदले करीब 45 लाख रुपये की व्यवस्था संबंधी मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख भी किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि विश्वविद्यालय ने सत्यापन के बाद 20 अभ्यर्थियों का अनंतिम सीट आवंटन निरस्त किया था। याचिका में सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए गृह, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व और कार्मिक विभाग के सचिवों समेत डीजीपी, सीबीआई निदेशक, देहरादून डीएम और चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।


