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उर्स/मेले में जेबकतरो का “रिमोट कंट्रोल” किसके हाथ में रहा?::

जायरीन पकड़ते रहे जेबकतरे, पुलिस की कार्रवाई बनी रहस्य? आखिरकार पकड़े गए जेबकतरे कहां गए?.......(पढ़िए खबर)

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क्लिक उत्तराखंड:-(ब्यूरो) पिरान कलियर में साबिर पाक के सालाना उर्स में उमड़ी जायरीनों की भारी भीड़ के बीच जेबकतरी की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। जायरीनों को जेबकतरों से बचाने के लिए पुलिस ने बाकायदा विशेष जेबकतरा एस्क्वायड तैयार किया था। लेकिन उर्स के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि भीड़ के बीच जेबकतरे लगातार सक्रिय रहे और कई जायरीनों के मोबाइल, नगदी व सामान पर हाथ साफ कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस की विशेष टीम की सक्रियता से ज्यादा जायरीनों की सतर्कता नजर आई। जायरीनों ने खुद कई जेबकतरों को पकड़ लिया और करीब दर्जनभर से अधिक शातिर जेबकतरों को पुलिस के हवाले किए था। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है? कि जिन्हें जायरीन पकड़कर पुलिस तक पहुंचा रहे थे, उनके खिलाफ आगे की क्या कार्यवाही हुई? क्या पूछताछ हुई? क्या कोई मुकदमा दर्ज हुआ? क्या इनके पीछे सक्रिय गिरोह तक पुलिस पहुंच पाई? या फिर जेबकतरों को पकड़ने और छोड़ने का सिलसिला ही चलता रहा? लल्लनटॉप सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उर्स में जेबकतरी के लिए करीब एक दर्जन जेबकतरों को सीमावर्ती राज्य से कथित तौर पर ‘ठेके’ पर बुलाए जाने की चर्चा है। यदि यह बात जांच में सही साबित होती है तो सवाल यह है कि इतने बड़े नेटवर्क को किसका सहारा था? और इतनी बड़ी संख्या में जेबकतरे उर्स की भीड़ तक कैसे पहुंच गए? लल्लनटॉप सूत्र ने यह भी दावा किया हैं कि नगर पंचायत के मुकर्रबपुर निवासी एक व्यक्ति ने सीमावर्ती राज्य से भाड़े पर बुलाए गए जेबकतरों को संरक्षण देना का आरोप भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।

इनकी भी कटी जेब……

जेबकतरी का शिकार हुए जायरीनों में झांसी निवासी खलील का बैग, बनारस निवासी मुस्तफा का मोबाइल, रामपुर निवासी तालिब का आईफोन और हापुड़ निवासी फुरकान का मोबाइल चोरी होने की शिकायत सामने आई। एटा निवासी शाकिर की नगदी तथा हसनपुर अमरोहा निवासी नईम और बुलंदशहर निवासी रहीश की जेब कटने की बात भी सामने आई है। वही कुछ जायरीनों ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की हैं। इसके अलावा कई जायरिनों ने जेबकतरों को मौके से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। उधर, उर्स/ मेले की ड्यूटी में तैनात कुछ पीआरडी जवानों की संलिप्ता भी संदेह के घेरे में हैं।  जिसको लेकर लोग उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह है कि यदि सुरक्षा में तैनात जवानों की मौजूदगी के बावजूद जेबकतरे बेखौफ सक्रिय रहे? तो आखिर निगरानी व्यवस्था में चूक कहां हुई? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पकड़े गए जेबकतरों का रिमोर्ट कंट्रोल कहां से संचालित किया जा रहा था? जिस यकीन के साथ जायरीनों ने जेबकतरों को पुलिस के हवाला किया था। अब कार्यवाही ना होती देख जायरीनों का पुलिस के प्रति भरोसा उठाता नजर आ रहा है। जब इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो वह जांच की बात कर पल्ला झड़ते नजर आए।

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