
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सरकारी विद्यालयों और प्रशासनिक कार्यालयों में मीडिया की रिपोर्टिंग, वीडियोग्राफी और लाइव प्रसारण पर लगाई जा रही कथित पाबंदियों को लेकर नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने सवाल खड़े किए हैं।
संस्थान के अध्यक्ष कृष्णकान्त ने उत्तराखंड शासन और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर पूछा कि आखिर किस कानूनी आधार पर सार्वजनिक संस्थानों में मीडिया को ‘नो मीडिया जोन’ की चेतावनी दी जा रही है?
संस्थान के मुताबिक, 25 अगस्त को राजकीय प्राथमिक विद्यालय शान्तरशाह की दीवार पर बिना अनुमति प्रवेश और रिकॉर्डिंग को लेकर FIR समेत कार्रवाई की चेतावनी प्रदर्शित मिली।
वहीं गदरपुर एसडीएम कार्यालय में भी बिना अनुमति वीडियोग्राफी और लाइव प्रसारण पर कार्रवाई की चेतावनी लगाए जाने का उल्लेख पत्र में किया गया है। कृष्णकान्त ने कहा कि बच्चों की निजता और सुरक्षा से जुड़े कानूनों का पालन जरूरी है, लेकिन इन्हीं प्रावधानों की आड़ में जनहित की पत्रकारिता को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार या कदाचार का मामला सामने आए तो क्या उसकी रिकॉर्डिंग भी संबंधित अधिकारी की अनुमति पर निर्भर होगी?संस्था ने शासन से दोनों मामलों की वैधानिक जांच कराने और प्रदेश के सरकारी संस्थानों के लिए स्पष्ट SOP जारी करने की मांग की है। कृष्णकान्त ने कहा, “सार्वजनिक संस्थान जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकते। कानून का पालन जरूरी है, लेकिन कानून के बिना बनाई गई पाबंदी पत्रकारिता का नियम नहीं बन सकती।



