
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) पिरान कलियर में साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स के दौरान खानकाह फैजान-ए-वाहिद में 14 रब्बी अव्वल की रात रूहानी और सूफियाना माहौल के बीच जश्ने शमशुल आजम का आयोजन किया गया।
महफिल में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे मशहूर कव्वालों ने साबिर पाक की शान में सूफियाना कलाम पेश कर ऐसा समां बांधा कि अकीदतमंद देर रात तक रूहानी रंग में सराबोर नजर आए।
खानकाह फैजान-ए-वाहिद के गद्दीनशीन सैय्यद फरीद आलम साबरी की सरपरस्ती में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत लंगर तकसीम करने के साथ हुई। इसके बाद महफिल-ए-शमा सजी, जिसमें बरेली, सहारनपुर, आगरा, मेरठ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कव्वालों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कव्वाल आसिफ नियाजी उदयपुरी ने साबिर पाक की शान में कलाम पेश किया.
जिसे सुनकर महफिल में मौजूद अकीदतमंद झूम उठे। इस दौरान खानकाह परिसर सूफियाना कलाम, अकीदत और रूहानी कैफियत से सराबोर रहा। महफिल में देश की खुशहाली, आपसी भाईचारे, अमन-चैन और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआएं की गईं।
गद्दीनशीन सैय्यद फरीद आलम साबरी ने कहा कि साबिर पाक के उर्स के दौरान जश्ने शमशुल आजम की परंपरा वर्षों पुरानी है। खानकाहें हमेशा से मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देती आई हैं। उन्होंने कहा कि हजरत साबिर पाक ने सब्र और इंसानियत का जो संदेश दुनिया को दिया.
उसी की वजह से आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से जायरीन कलियर पहुंचकर रूहानी फैज हासिल करते हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की दरगाहें इंसान को सुकून और मोहब्बत का रास्ता दिखाती हैं। यही वजह है कि हर मजहब के लोग इन मुकद्दस दरगाहों पर हाजिरी लगाकर अपनी मन्नत-मुरादें मांगते हैं।
वहीं, पड़ोसी मुल्क नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मची तबाही को लेकर भी महफिल में खास दुआ कराई गई। नेपाल के प्रभावित लोगों के लिए राहत, सलामती और हालात बेहतर होने की दुआ के साथ पूरी दुनिया में अमन और इंसानियत कायम रहने की फरियाद की गई। इस मौके पर साहिबजादा शाह यावर मियां, सैय्यद शान मियां, सैय्यद शोएब अलीगढ़, सैय्यद वासिफ मियां, राव अबरार, राव एजाज, कालू खान, फरमान, सैफ अली, जावेद खान, गुलफराज, चाहत, शाकिर, इमरान समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।



