
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स में शामिल होने के लिए देशभर से जायरीनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया हैं। इसी दौरान चौपहिया वाहन पार्किंग व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि चौपहिया वाहन पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क की सीमाएं लांघकर जायरीनों की जेब पर खुलेआम बोझ डाला जा रहा है।
कहीं तय दर से अधिक रकम वसूली जा रही है तो कहीं अधिक राशि की रसीद थमाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह कथित वसूली किसकी शह पर चल रही है?
दरगाह साबिर पाक के उर्स में आने वाले जायरीन अपने वाहनों को सुरक्षित खड़ा करने के लिए पार्किंग स्थलों का रुख करते हैं,
लेकिन आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्हें निर्धारित शुल्क के बजाय मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
बाहर से आने वाले जायरीन अक्सर नियमों और निर्धारित दरों से अनजान होते हैं, जिसका कथित तौर पर फायदा उठाया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल चौपहिया पार्किंग की रसीदों को लेकर है। यदि प्रशासन ने चौहपिया पार्किंग शुल्क और उसकी शर्तें तय की हैं तो निर्धारित दर से अधिक राशि की रसीद आखिर कैसे काटी जा रही है? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों की नजर इस पर नहीं है या फिर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते कथित वसूली का यह खेल बेखौफ चल रहा है?
वही ठेकेदार अपने मनमाने तरीके से 100-100 रुपए की रशीद काटकर जायरीनों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। जब इस संबंध में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचन्द्र सेट और तहसीलदार/दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी से बात करने का प्रयास किया गया तो उन से संपर्क नहीं हो पाया।



