
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) कलियर दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स/मेले में अब महज चंद दिन बाकी हैं। उर्स की तैयारियों को लेकर प्रशासन और दरगाह प्रबंधन अपने-अपने स्तर से व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
वही उर्स/मेले को लेकर उच्च स्तर पर अधिकारियों की बैठकें भी हो चुकी हैं और जायरीनों की सुविधा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन्हीं तैयारियों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्थाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स से चंद दिन पहले ही दरगाह कार्यालय के सामने करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए साबरी मेहमानखाने (मुसाफिरखाने) को इस बार टीन शेड लगाकर बंद कर दिया गया है। जोकि प्रशासन की तरफ से उर्स/मेले के दौरान पहली बार कदम उठाया गया हैं।
सवाल यह है? कि जिस सुविधा का निर्माण ही उर्स में आने वाले जायरीनों को ठहरने और राहत देने के लिए किया गया था, आखिर उसी के दरवाजे उर्स के दौरान क्यों बंद किए जा रहे हैं? सबसे बड़ा सवाल तो बरसात को लेकर है।
इन दिनों बारिश का दौर जारी है। ऐसे में देशभर से आने वाले जायरीन अगर बारिश में फंस गए तो सिर छुपाने के लिए कहां जाएंगे? क्या करोड़ों की लागत से बना मेहमानखाना उनके किसी काम नहीं आएगा? या फिर मेहमानखाना सफेद हाथी के सामान खड़ा रहेगा।
लेकिन हैरानी की बात यह भी है कि एक तरफ जायरीनों की सुविधा के नाम पर दरगाह प्रबंधन की ओर से लाखों रुपये खर्च कर जर्मन हैंगर लगाए जा रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर करोड़ों की लागत से तैयार स्थायी सुविधा के मुसाफिरखाने को टीन शेड से बंद कर दिया गया है। ऐसे में उर्स शुरू होने से पहले ही साबरी मेहमानखाने को बंद किए जाने का कारण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।
तहसीलदार/दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी ने बताया कि मेहमान खाने में कुछ व्यक्ति लंबे समय से कब्जा जमाये हुए थे। जिसकी शिकायत मिल रही थी शिकायत के आधार पर अभी मेहमान खाने को खाली कर बंद किया गया। उर्स/मेले के दौरान जायरीनों की भीड़ बढ़ने पर मेहमान खाने को खोल दिया जायगा।



