
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सूचना का अधिकार (आरटीआई) जैसे पारदर्शिता के महत्वपूर्ण कानून की आड़ में सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से डराने, धमकाने और ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है।
विकासखंड रुड़की के तीन सरकारी अधिकारियों ने तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ता आकाश सैनी, जेनिश सैनी और उनके सहयोगियों पर मानसिक उत्पीड़न, अवैध वसूली की मांग और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद अब इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।
ग्राम विकास अधिकारी निर्मल सिंह, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी काजल और सहायक समाज कल्याण अधिकारी संध्या शर्मा ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि आरटीआई के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है और सरकारी कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत विकास अधिकारी काजल की ओर से जेनिश सैनी आदि के खिलाफ कलियर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई जा चुकी है।
हालांकि, उनका आरोप है कि अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं ग्राम विकास अधिकारी निर्मल सिंह ने आरोप लगाया कि आकाश सैनी के सहयोगी जेनिश सैनी ने आरटीआई की आड़ में उनसे पांच लाख रुपये की अवैध मांग की। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उनके पास व्हाट्सएप चैट सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।
अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोगों का नेटवर्क उत्तराखंड के अलावा सीमावर्ती राज्यों तक फैला हुआ है।
इस पूरे मामले को लेकर तीनों अधिकारी कानूनी मदद के लिए नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत के कार्यालय पहुंचे जहां कृष्णकांत ने अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर मीडिया से कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
न कि उसकी आड़ में अधिकारियों का उत्पीड़न, धमकी, कथित ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाने का खेल चलाना। कृष्णकांत ने आकाश सैनी, जेनिश सैनी और उनके सहयोगियों के कथित नेटवर्क, आपराधिक पृष्ठभूमि तथा संभावित संरक्षण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष जांच के आधार पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों में सच्चाई है तो इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और शिकायत के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? मामले की निष्पक्ष जांच से ही पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकेगी।



