
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) स्वर्णभूमि इंटरनेशनल बुद्धिज्म फाउंडेशन से जुड़े वित्तीय विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। संस्था के पूर्व कर्मचारी जुरेश कुमार को एक साल की सजा सुनाए जाने के बाद अब संस्था के 24 पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है।
संस्था के मूल वाद पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), हरिद्वार की अदालत ने संस्था के पूर्व कर्मचारीयों को नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई के बाद संस्था और पूर्व 24 कर्मचारियों के बीच कानूनी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
गौरतलब है कि 28 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार की अदालत ने 22 लाख रुपये के वित्तीय परिवाद में पूर्व कर्मचारी जुरेश कुमार को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास और 22 लाख 60 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अदालत ने जुर्माने में से 22 लाख 50 हजार रुपये संस्था के संस्थापक निदेशक कृष्णकांत को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश भी दिया था। अब इसी विवाद की अगली कड़ी में संस्था के मूल वाद के आधार पर जुरेश कुमार समेत 24 पूर्व कर्मचारियों के विरुद्ध घोषणात्मक डिक्री और स्थायी निषेधाज्ञा की कार्यवाही शुरू की गई है।
इनमें जुरेश कुमार समेत रविना, मांगे राम, आशू, योगेश कुमार, आरजू, उपेंद्र कुमार, राकेश कुमार, अक्षय कुमार, आदित्य सैनी, सुनील कुमार, वंशिका, कनिका चौहान, वीरेंद्र आर्य, शुभम आर्य, सविता आर्य, शेखर कुमार, शेरपाल चौहान, अमित कुमार, अक्षय कुमार, राखी, प्रीतिका आर्य, अंकित कुमार और मयंक कुमार का नाम शामिल हैं।
वाद में दिसंबर 2021 में जुरेश कुमार की ओर से दिए गए एक शपथपत्र का भी हवाला दिया गया है। मूल वाद के अनुसार उक्त शपथपत्र में जुरेश कुमार ने अपने त्यागपत्र की पुष्टि करने के साथ अपने अधीन और उनसे जुड़े उपरोक्त कर्मचारियों के नामों का उल्लेख किया था। इसे मौजूदा न्यायिक कार्यवाही के अभिलेख का हिस्सा बनाया गया है।
मूल वाद में अदालत से मांग की गई है कि जुरेश कुमार और अन्य पूर्व कर्मचारियों को संस्था के नाम, प्रतीक चिह्न, पदनाम, मुहर, लेटरहेड और आधिकारिक दस्तावेजों का बिना अनुमति इस्तेमाल करने से रोका जाए। इसके साथ ही संस्था के नाम पर किसी भी तरह का प्रतिनिधित्व करने, धन संग्रह करने, वित्तीय लेन-देन करने अथवा संस्थागत गतिविधियां संचालित करने पर भी स्थायी रोक लगाने की मांग की गई है। वाद में संस्थापक निदेशक कृष्णकांत की प्रतिष्ठा और संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।



