
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) उत्तराखंड में नीट-यूजी के जरिए एमबीबीएस प्रवेश में कथित फर्जी आरक्षण प्रमाणपत्रों का मामला अब केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा।
हाईकोर्ट ने प्रमाणपत्र बनाने और जारी करने वाली पूरी व्यवस्था की भूमिका जांचने के निर्देश दिए हैं। इससे तहसील स्तर से लेकर संबंधित सरकारी अधिकारियों तक की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ गई है।
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से कृष्णकांत के निर्देशन में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गृह सचिव और राजस्व सचिव को जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए।
अदालत ने साफ किया कि जांच केवल कथित फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित समेत संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में CSC संचालक, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और अन्य सरकारी अधिकारियों की क्या भूमिका रही, इसकी भी जांच की जाए।
हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर जांच समिति गठित करने और समिति गठन के छह महीने के अंदर सरकार को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच में यदि किसी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से प्रमाणपत्र हासिल कर प्रवेश या नियुक्ति में अनुचित लाभ लेने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए भी अहम सुझाव दिया है। सरकार से आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच के लिए स्थायी समिति गठित करने पर विचार करने को कहा गया है।



