
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सूफियाना नगरी पिरान कलियर में जश्न-ए-गौसुल आजम (ग्यारहवीं शरीफ) अकीदत और रूहानी कैफियत के साथ मनाया गया।
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बरेली शरीफ की खानकाह-ए-शराफतिया सकलैनियां के गद्दीनशीन शाह गाजी मियां मुख्य अतिथि रहे। साबरी कायनात पैलेस से दरबार-ए-साबरी तक जुलूस निकाला गया। शाह गाजी मियां, साहिबजादा शाह यावर मियां समेत बड़ी तादाद में अकीदतमंद इसमें शामिल हुए।
दरबार-ए-साबरी में चादरपोशी और फातिहा ख्वानी के बाद मुल्क में अमनो-सलामती, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआ की गई।
शाह यावर एजाज कुद्दुसी साबरी ने कहा कि बुजुर्गाने दीन की तालीम मोहब्बत, इंसानियत और खिदमत का पैगाम देती है।
वहीं हाजी गुलशाद सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे और आपसी सौहार्द को मजबूत करते हैं।
खादिम मुनव्वर अली साबरी ने कहा कि बुजुर्गाने दीन की जिंदगी इंसानियत और खिदमत का बेहतरीन उदाहरण रही है। उन्होंने कहा कि जश्न-ए-गौसुल आजम जैसे कार्यक्रमों का मकसद सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों को मोहब्बत, सेवा और भाईचारे का संदेश देना भी है। उन्होंने आयोजन में पहुंचे सभी अकीदतमंदों का स्वागत किया।
सूफी राशिद अली साबरी ने कहा कि सूफियाना परंपरा हमेशा से मोहब्बत और इंसानियत की बात करती आई है। उन्होंने कहा कि हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह की जिंदगी लोगों को नेक रास्ते पर चलने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने देश में अमन और भाईचारे के लिए दुआ की।
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी के सेक्रेट्री राहिल कुरैशी ने कहा कि सोसायटी की ओर से पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और सूफी परंपरा के संदेश को आम करने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने शिरकत की और आयोजन को सफल बनाने में सभी ने सहयोग किया। नातख्वानों के कलाम से महफिल में रूहानी रंग और गहरा हो गया। अकीदतमंद अकीदत में झूमते नजर आए।
कार्यक्रम के बाद नमाज-ए-जुहर के पश्चात सज्जादानशीन की कोठी पर लंगर-ए-आम का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इस मौके पर आलम सैफी, कल्लू भाई, परवेज आलम, फैसल खान उर्फ मोंटू, आदिल कुरैशी, सावेज खान, शाहबाज उर्फ गुल्लू, शम्स अली साबरी, रिहान कुरैशी, वाजिद अंसारी, रियाज कुरैशी, रईस अंसारी, हाजी गुलजार, शफीक साबरी, शालू कुरैशी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।



