
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) इश्क-ए-साबिर की खुशबू और अकीदत के सैलाब के बीच विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स का रूहानी आगाज हो गया।
गुरुवार को बरेली से अकीदतमंदों के जत्थे के साथ साबरी झंडा कलियर शरीफ पहुंचा तो दरगाह परिसर में अकीदत और सूफियाना रंग देखते ही बना। बरेली से परंपरागत रूप से सूफी वसीम साबरी और कमाल साबरी की अगुवाई में साबरी झंडा मुबारक लेकर 8 दिनों का सफ़र तय कर अकीदतमंद कलियर पहुंचे। झंडे के पहुंचते ही बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर में जमा हो गए।
उससे पहले सज्जादानशीन परिवार के साहिबजादा शाह यावर मियां, शाह यासिर और नोमी मियां ने साबरी झंडे के साथ कलियर पहुंचे अकीदतमंद जायरीनों का फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। इसके बाद दरगाह के बुलंद दरवाजे पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई।
सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दूसी साबरी ने बुलंद दरवाजे पर परचम कुशाई की रस्म अदायगी की। परचम कुशाई की रस्म के दौरान पूरा दरगाह परिसर अकीदत के रंग में रंग गया। परचम कुशाई की रस्म के दौरान विशेष दुआ कराई गई। और उर्स की कामयाबी, मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, मोहब्बत, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी गई।
बताया गया है कि परचम कुशाई की यह रस्म महज एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि साबिर पाक की दरगाह से जुड़ी सदियों पुरानी अकीदत और रूहानी विरासत की पहचान मानी जाती है। हर साल साबरी झंडे के पहुंचने के साथ ही उर्स की रस्मों का सिलसिला आगे बढ़ता है। परचम कुशाई की रस्म के दौरान भारी पुलिस फोर्स और खुफिया तंत्र सक्रिय रहा।



