
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन विभागीय अधिकारियों के कंधों पर है, यदि उन्हीं की आंखों के सामने सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश होने लगे तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
कलियर क्षेत्र में कावड़ पटरी पर हाईवे पुल के पास सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की बेशकीमती सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का मामला सामने आने से विभागीय कार्यप्रणाली कठघरे में आ गई है।
आरोप है कि जमीन पर कब्जे की नीयत से भूमाफियाओं ने वर्षों पुराने सरकारी नलकूप के पानी के ओवरफ्लो की निकासी के लिए बनाई गई हौज को ही तोड़ डाला।
इतना ही नहीं, कावड़ पटरी के किनारे स्थित जमीन पर जेसीबी चलाकर उसे समतल कर दिया गया और वहां रास्ता बनाने की तैयारी की जा रही है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का यह मामला केवल जमीन पर कब्जे की कोशिश तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी नलकूप की हौज तोड़े जाने और जमीन पर जेसीबी चलाए जाने के आरोपों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
आखिर सरकारी जमीन पर जेसीबी मशीनें चलती रहीं और जिम्मेदार कुछ कर्मचारियों ओर अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी या फिर सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद अनदेखी की जाती रही?
यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने सिंचाई विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों पर भूमाफियाओं से मिलीभगत की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही इस कथित कब्जे पर रोक नहीं लगाई गई तो धीरे-धीरे सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और कब्जे का दायरा बढ़ सकता है। मामले को लेकर अब क्षेत्र के लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजने की तैयारी में हैं।
पत्र के माध्यम से कावड़ पटरी और कलियर क्षेत्र में सिंचाई विभाग की सरकारी भूमि पर कथित कब्जों, नलकूप की हौज तोड़े जाने तथा जमीन समतल किए जाने के मामले की जांच कराने की मांग की जाएगी।
साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी। अब देखना यह है कि सरकारी जमीन को बचाने के लिए सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आगे आते हैं या फिर भूमाफियाओं के हौसले इसी तरह बुलंद रहते हैं।



