
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक की करोड़ों रुपये की आय और ठेकेदारों पर वर्षों से लंबित बकाया रकम की वसूली का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
दरगाह के वित्तीय प्रबंधन को लेकर अब 15 साल के पुराने हिसाब-किताब की परतें खोलने की मांग उठी है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जिलाधिकारी हरिद्वार और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर वर्ष 2009 से अब तक के वित्तीय रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
साथ ही सवाल उठाया है कि करोड़ों रुपये की बकाया वसूली में आखिर इतनी लंबी देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सस्था के अध्यक्ष कृष्णकांत ने पत्र में उपलब्ध अभिलेखों का हवाला देते हुए बताया कि दरगाह के खातों में करीब 62 करोड़ रुपये की धनराशि दर्शाई गई है।
इसके बावजूद वर्ष 2009-10 से 2016-17 के बीच विभिन्न ठेकों की करोड़ों रुपये की बकाया रकम लंबे समय से लंबित होने का उल्लेख किया गया है। वर्ष 2018-19 और 2019-20 के कार्यादेशों से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी उठाई गई है।
सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2014-15 के एक ठेके की 34.50 लाख रुपये की बकाया राशि को लेकर है। पत्र के मुताबिक, इस रकम की वसूली के लिए करीब दस साल बाद 26 अप्रैल 2025 को वसूली प्रमाणपत्र जारी किया गया। सवाल यह है कि जब बकाया रकम वर्षों से लंबित थी तो समय रहते वसूली की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
इसी तरह वर्ष 2015-16 के जूता रखाई ठेके की तीन लाख रुपये की मूल बकाया राशि और 30 हजार रुपये संग्रह व्यय की वसूली का ब्योरा भी मांगा गया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस और वसूली प्रमाणपत्र जारी कर देना पर्याप्त नहीं है।
असल सवाल यह है कि ठेकेदारों से वास्तव में कितनी रकम सरकारी खाते में जमा हुई और कितनी राशि आज भी बकाया है। संस्था ने मांग की है कि जांच का दायरा केवल ठेकेदारों तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित अवधि में जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों, प्रबंधकों और कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जाए।
पत्र में दरगाह की आय-व्यय, ठेकों, भुगतान, निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं के अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, बकाया रकम की वसूली और पारदर्शी व्यवस्था के लिए स्वतंत्र एवं सक्षम प्रशासक नियुक्त करने की मांग उठाई गई है।
अब बड़ा सवाल यही है कि दरगाह की करोड़ों की आय और वर्षों से अटकी बकाया रकम का पूरा हिसाब कब सामने आएगा? प्रशासनिक जांच होती है या फिर करोड़ों की वसूली का यह मामला कागजों में ही उलझा रहता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



