
क्लिक उत्तराखंड:-(ब्यूरो) 22 लाख रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में हरिद्वार की अदालत ने स्वर्णभूमि इंटरनेशनल बुद्धिज्म फाउंडेशन के पूर्व कर्मचारी जुरेश कुमार को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे एक साल की कैद और 22 लाख 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माने में से 22 लाख 50 हजार रुपये परिवादी कृष्णकांत को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 10 हजार रुपये सरकारी कोष में जमा होंगे। जुर्माना नहीं देने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
प्रथम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट तनुजा कश्यप की अदालत ने बुधवार को मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी की ओर से बचाव में दिए गए तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
भुगतान के लिए दिया चेक हुआ बाउंस….
मामले के अनुसार, जुरेश कुमार कृष्णकांत की संस्था में काम करता था। वर्ष 2021 में संस्था की धनराशि और अन्य सामग्री वापस करने को लेकर विवाद हुआ। कृष्णकांत के अनुसार, वित्तीय देनदारी चुकाने के लिए जुरेश कुमार ने 22 लाख रुपये का चेक दिया था। बैंक में चेक लगाने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो सका। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी रकम नहीं मिलने पर कृष्णकांत ने फरवरी 2022 में अदालत में परिवाद दायर किया।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आई फैसले की घड़ी….
करीब चार साल से लंबित इस मुकदमे में उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल ने हस्तक्षेप करते हुए छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई में तेजी आई और अदालत ने साक्ष्यों व दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया।अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि चेक को सुरक्षा के तौर पर दिए जाने या उसमें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विवरण भरे जाने मात्र से कानूनी देनदारी खत्म नहीं हो जाती। इस मामले में दोषसिद्धि के साथ अदालत ने परिवादी को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की रकम देने का आदेश भी दिया है।



