
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टरों के रिक्त पद नहीं भरे जाने का कारण पूछा। इस पर राज्य सरकार ने मार्च 2027 तक प्रदेश में डॉक्टरों के सभी रिक्त पद भरने का आश्वासन दिया।
वहीं, हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और नियुक्तियों से जुड़े मामलों पर चार महीने के भीतर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, उप-जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पदों पर नियुक्तियों के साथ ही चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का भी समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए। इसके लिए संस्था की ओर से दिए गए पत्र में उठाए गए बिंदुओं पर आदेश प्राप्त होने के चार महीने के भीतर उचित निर्णय लेने को कहा गया है।
840 विशेषज्ञ पदों में 545 खाली, हजारों मरीजों को करना पड़ा रेफर….
जनहित याचिका में स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए गए। याचिका के अनुसार, प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 840 स्वीकृत पदों में से 545 पद खाली हैं। इसके अलावा आपात स्वास्थ्य बजट का महज 5.82 प्रतिशत खर्च होने और अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण एक वर्ष में 52,942 मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किए जाने का मुद्दा भी कोर्ट के सामने रखा गया। इन आंकड़ों ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब सरकार के सामने मार्च 2027 तक रिक्त पद भरने के आश्वासन को अमल में लाने की चुनौती है। वहीं, हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत स्वास्थ्य विभाग को चार महीने के भीतर नियुक्तियों और सुविधाओं से संबंधित समस्याओं पर निर्णय लेना होगा।
अब निगाहें सरकार की कार्रवाई पर…..
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रक्रिया कब तक पूरी होती है और मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा कब मिलती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश और सरकार के आश्वासन से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है।



