
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) दीवारें पुरानी हैं, छत जवाब दे रही है और नीचे बैठकर सरकारी कामकाज चल रहा है। शायद जिम्मेदारों को किसी अनहोनी का इंतजार है।
मंगलवार को दरगाह के आवासीय भवन में संचालित एलआईयू कार्यालय की छत ने खुद ही अपनी बदहाली की कहानी बयां कर दी। अचानक छत का हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा।
कमरे में मौजूद एलआईयू कर्मी चंद फासले से मलबे की चपेट में आने से बच गया। हादसे के समय कोई फरियादी मौजूद नहीं था, वरना तस्वीर कुछ और हो सकती थी। इस भवन के कमरों में केवल एलआईयू कार्यालय ही नहीं,
बल्कि पुलिसकर्मियों के रहने के साथ डाकघर और अन्य कामकाज भी होता है। यानी जिन कमरों की छत कब जवाब दे जाए, वहां लोगों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चेतने के लिए और कितनी चेतावनियां चाहिए? हाल ही में धनौरी स्थित अमृत लॉ कॉलेज की इमारत का हिस्सा गिरने से एक पीएसी जवान की जान जा चुकी है।
उस हादसे ने जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब कलियर में छत गिरने की घटना ने उसी सवाल को फिर सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
फिलहाल इस बार किस्मत ने साथ दिया और मामला मलबा गिरने तक सिमट गया। लेकिन जर्जर छत ने जिम्मेदारों के लिए खतरे की घंटी जरूर बजा दी है। अब देखना यह है कि भवन की जांच और मरम्मत शुरू होती है या हमेशा की तरह किसी बड़े हादसे के बाद कागजी घोड़े दौड़ाए जाएंगे।



