
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) घर से ढोल की थाप, परिजनों में खुशियां थी, कि उनके बेटे 5वी बार जल उठाकर वापस लौट आएंगे लेकिन शिवभक्ति की राह पर निकले दो कांवड़िए और उनके परिजन शायद यह नहीं जानते थे कि जिनको घर से खुशियों के साथ हरिद्वार भेज रहे हैं वह अब कभी वापस लौट नहीं लौट पाएंगे।
उनकी मौत किसी प्राकृतिक आपदा से नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही की भेंट चढ़ने वाली है। बहादराबाद कोतवाली क्षेत्र के बढ़ेडी राजपूतान के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे आराम कर रहे दो कांवड़ियों कृष्ण और तनुज के ऊपर लोहे का भारी चैनल (गार्डर) गिरा और देखते ही देखते दो परिवारों की दुनिया उजड़ गई। इस हादसे में दो कांवड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई।
“बोल बम” के जयघोष के बीच घटनास्थल पर चीखें गूंज उठीं, श्रद्धा का सफर मातम में बदल गया और घटनास्थल पर फ्लाईओवर के नीचे खून ही खून दिखाई दिया। इस हादसे ने सिर्फ दो जानें नहीं लीं, बल्कि सरकारी दावों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया।
सबसे मार्मिक दृश्य उस छोटे भाई का था, जो अपने बड़े भाई के साथ कांवड़ लेकर चला था। किस्मत ने उसे बचा लिया, लेकिन उसकी आंखों के सामने उसका भाई हमेशा के लिए बिछड़ गया। यह दर्द शायद उम्रभर उसका पीछा नहीं छोड़ेगा।
लेकिन हादसे की कहानी यहीं खत्म नहीं होती… हादसे के बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया। जैसे ही घटना सुर्खियों में आई, जिला प्रशासन और फ्लाईओवर निर्माण एजेंसी के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और क्रेन से लोहे के गार्डर को हटवाने लगे, जिन्हें स्थानीय लोग पहले से खतरे की घंटी बता रहे थे।
लेकिन सवाल यह है कि जो काम हादसे के कुछ घंटों बाद हो सकता था, वह हादसे से पहले क्यों नहीं किया गया? क्या सुरक्षा इंतजाम केवल कागजों में थे? क्या जिम्मेदार विभागों ने लाखों कांवड़ियों की आवाजाही के बावजूद निर्माण स्थल का सुरक्षा ऑडिट किया था? इस हादसे ने सिर्फ दो परिवारों के चिराग नहीं बुझाए, बल्कि निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पूरे घटनाक्रम की पुलिस और NHAI से रिपोर्ट मांगी हैं। बरहाल सवाल यही है कि क्या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो पाएगी ये नहीं? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
कृष्ण की जनवरी में होनी थी शादी…..
मोदीनगर के भोजपुर स्थित गांव शकूरपुर निवासी कृष्ण और मुरादनगर के गांव जलालाबाद निवासी तनुज गहरे दोस्त थे। बताया कि दोनों लगभग पांच साल से एक साथ कांवड़ ला रहे थे। कृष्ण आईटीआई करने के बाद बिजली की एक वर्कशॉप पर इंटर्नशिप कर रहा था। पिता मटरू ने बताया कि कृष्ण का रिश्ता पक्का हो गया था और जनवरी में उसकी शादी होनी थी। मगर मौत से शादी से पहले कृष्ण पर झपटा मारा और परिवार की खुशियां छीन ली। घटना से गांव में मातम छा गया। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
तनुज कर रहा था अग्निवीर की तैयारी……
वहीं गांव जलालाबाद निवासी तनुज इंटरमीडिएट करने के बाद अग्निवीर और अन्य सैन्य बलों की तैयारी कर रहा था। तनुज की मौत की सूचना से गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पिता महेश, मां सीमा व छोटा भाई सागर का रो रोकर बुरा हाल है। कृष्ण और तनुज में गहरी दोस्ती थी। तनुज की ननिहाल शकूरपुर के समीपवर्ती गांव बखरवा में है। तनुज का ननिहाल में बहुत आना जाना था। तनुज और कृष्ण की दोस्ती यहीं से शुरू हुई थी। अब दोनों की हादसे में एक साथ मौत हो गई।



