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नमाज अदा करते वक्त शहीद हुए थे हजरत अली: बढ़ेड़ी राजपूतान में हजरत अली की शहादत को किया गया याद, या अली-या अली की सदाओं से गूंज उठी महफिल…(पढ़िए खबर)

इमाम सैय्यद शादाब खुशतर ने डाला प्रकाश

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क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) पैगंबर-ए- इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के दामाद, मुसलमानों के चौथे खलीफा व शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत दिवस के मौके पर बढ़ेड़ी राजपूतान गांव की जामा मस्जिद में हजरत अली की शहादत को याद किया गया।

इस दौरान मौलानाओं द्वारा हजरत अली की जीवनी पर प्रकाश डाला गया, वही हजरत अली की याद में नौहे पढ़े गए। इस बीच हर तरफ से या अली मौला, हैदर मौला की सदाएं बुलंद होती रहीं।

मुसलमानों के पहले इमाम हज़रत अली इब्न अबी तालिब पर 19 रमज़ान को इराक के कूफा की मस्जिद में नमाज़ के दौरान अब्दुर्रहमान इब्न मुलजिम ने तलवार से हमला किया था।

गांव की जामा मस्जिद के इमाम सैय्यद शादाब खुशतर इमाम सैय्यद शादाब खुशतरने बताया कि हजरत अली का पूरा जीवन इंसानियत की हिफाजत के लिए समर्पित था। उन्होंने बताया कि 19 रमजान की सुबह कूफे की मस्जिद में नमाज पढ़ते समय इब्ने मुलजिम नामक व्यक्ति ने जहर में डूबी तलवार उनके सिर पर मार दी थी।

इस हमले के कारण 21 रमजान को हजरत अली की शहादत हो गई। हज़रत अली के जीवन, आदर्शों और इस्लाम के लिए किए गए संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हज़रत अली न्याय, बहादुरी, इंसाफ और इंसानियत की मिसाल थे। उनका जीवन लोगों को सच्चाई, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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