
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) हरिद्वार जिले के ज्वालापुर और कनखल समेत अन्य क्षेत्रों में बैंक और फाइनेंस कंपनियों के नाम पर काम कर रही कुछ रिकवरी एजेंसियों की कथित मनमानी अब कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

आरोप हैं कि कई एजेंट सुप्रीम कोर्ट और रिजर्व बैंक की निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर खुलेआम सड़क पर वाहनों को जबरन कब्जे में ले रहे हैं। इतना ही नहीं, विरोध करने पर वाहन स्वामियों के साथ अभद्रता, धमकी और मारपीट तक की शिकायतें सामने आई हैं।

जानकारी के अनुसार, वाहन खरीदते समय बैंक और फाइनेंस कंपनियां ग्राहकों को आकर्षक योजनाओं और आसान किस्तों का भरोसा देकर लोन उपलब्ध कराती हैं।
लेकिन आर्थिक तंगी के चलते यदि कोई ग्राहक समय पर किश्त जमा नहीं कर पाता, तो कुछ मामलों में रिकवरी एजेंट कानून का पालन करने के बजाय दबंगई का रास्ता अपनाते नजर आते हैं।
बताया जा रहा है कि परिवार के साथ सफर कर रहे लोगों की गाड़ियां भी बीच सड़क पर रोककर जबरन कब्जे में ली जा रही हैं। कई मामलों में महिलाओं और बच्चों के सामने भी वाहन छीनने की घटनाओं की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी और वाहन जब्ती की स्पष्ट वैधानिक प्रक्रिया तय कर रखी है, तब आखिर कुछ रिकवरी एजेंट किसके संरक्षण में कानून को चुनौती दे रहे हैं? नियमों के अनुसार, ग्राहक को नोटिस देना, निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और किसी भी कार्रवाई में बल प्रयोग से बचना आवश्यक है। इसके बावजूद यदि सड़क पर गुंडागर्दी कर वाहन छीने जा रहे हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी हनन है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे कई मामलों की शिकायत पुलिस तक पहुंची है, जिनमें जबरन वाहन ले जाने और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतों के बाद पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लिया है।

सीओ ज्वालापुर संजय चौहान ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी रिकवरी एजेंट द्वारा कानून हाथ में लेने, मारपीट, धमकी देने या जबरन वाहन कब्जे में लेने की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और रिकवरी की कार्रवाई भी केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है।



