
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) उत्तराखंड में एमबीबीएस की राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला अब बड़े जांच के दायरे में आ सकता है।
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने करीब 770 अभ्यर्थियों के मूल निवास समेत अन्य दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत ने गृह सचिव शैलेश बगोली को पत्र सौंपकर हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक जल्द जांच कमेटी गठित करने की मांग उठाई है।
ट्रस्ट का दावा है कि मामला उस समय गंभीर हुआ, जब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी में एमबीबीएस दाखिले के लिए लगाए गए करीब 24 प्रमाणपत्रों की पड़ताल की गई। इनमें से 18 प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने का दावा किया गया है।
इसके बाद अन्य दाखिलों से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई तो करीब 770 अभ्यर्थियों की सूची सामने आई, जिनके मूल निवास अथवा संबंधित प्रमाणपत्रों की सत्यता पर संदेह जताया गया है। ट्रस्ट के अनुसार, संदिग्ध सूची में ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने उत्तराखंड का मूल निवास प्रमाणपत्र लगाकर राज्य कोटे में सीट हासिल की, जबकि उनकी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत दूसरे राज्यों से हुई है।
हालांकि ट्रस्ट ने साफ किया है कि दूसरे राज्य से पढ़ाई करना प्रमाणपत्र फर्जी होने का सबूत नहीं है। असल स्थिति दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। कृष्णकांत के मुताबिक, उत्तराखंड हाईकोर्ट के 15 अक्टूबर के आदेश के क्रम में चार सप्ताह के भीतर जांच कमेटी गठित की जानी है। उन्होंने मांग की कि जांच केवल छात्रों तक सीमित न रखी जाए।
प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों से लेकर दाखिले के दौरान उनका सत्यापन करने वाले विश्वविद्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाए। ट्रस्ट ने शासन से तय समयसीमा में जांच पूरी कर गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की है।



