
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) दरगाह साबिर पाक के ख़ादिम-ए-ख़ास हज़रत बाबा गुलाम जिलानी का सालाना उर्स बड़े एहतराम, अकीदत और मोहब्बत के जज़्बे के साथ मनाया गया। पिरान कलियर की सरज़मीं इन मुबारक लम्हों में पूरी तरह रूहानी नूर से जगमगा उठी।
रविवार की सुबह कुल शरीफ़ की पाकीज़ा रस्म अदायगी के साथ यह उर्स मुकम्मल हुआ, जहाँ दूर-दराज़ से आए सैंकड़ों ज़ायरीन ने हाज़िरी देकर ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया और मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक़्क़ी और भाईचारे के लिए ख़ुसूसी दुआएँ मांगीं।
इस मुबारक उर्स का आगाज़ जुमे के रोज़ हुआ, जिसमें हरियाणा, पंजाब और कई दूसरे सूबों से अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। दरगाह परिसर में हर तरफ इबादत, मोहब्बत और रूहानियत का दिलकश मंज़र देखने को मिला। शनिवार को बाद नमाज़-ए-मग़रिब ग़ुस्ल की रस्म अदा की गई, जिसमें ज़ायरीन की भारी तादाद ने शिरकत कर अपनी अकीदत का इज़हार किया।
बाद नमाज़-ए-ईशा, बाबा गुलाम जिलानी के ख़लीफ़ा सूफी मुहम्मद राशिद साबरी की ख़ानकाह पर लंगर-ए-आम का शानदार एहतिमाम किया गया, जहाँ सैकड़ों लोगों ने मिल-बाँटकर नियाज़ हासिल की। इसी सिलसिले में साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी की सरपरस्ती में महफ़िल-ए-समा का रूहानी आयोजन हुआ, जिसने पूरे माहौल को इश्क़-ए-इलाही में सराबोर कर दिया। मशहूर क़व्वाल निज़ाम साबरी ने अपने सूफ़ियाना कलाम से ऐसी समा बाँधी कि ज़ायरीन झूम उठे और दिलों पर रूहानियत की गहरी छाप छोड़ गए।
रविवार सुबह करीब 10 बजे कुल शरीफ़ की अहम और मुकद्दस रस्म अदा की गई, जिसमें साबरी सिलसिले के बुज़ुर्गान, सूफ़ी हज़रत, बाबा गुलाम जिलानी के मुरीदीन और बड़ी तादाद में ज़ायरीन मौजूद रहे। इस मौके पर पूरी फ़ज़ा “आमीन” की सदाओं से गूंज उठी और मुल्क की सलामती, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआएँ की गईं।
इस रूहानी और मुबारक मौके पर नोमी मियां, सूफी मुहम्मद राशिद साबरी, शफ़ीक़ साबरी, लियाक़त साबरी, अकरम साबरी, समद साबरी, अब्दुल समद, रोहित साबरी, रघु साबरी, लक्की साबरी, शिव साबरी, शम्स अली, ग़ुलाम ख़्वाजा, मुनव्वर मीरहसन समेत सैंकड़ों अकीदतमंदों की मौजूदगी ने इस उर्स की रौनक को और भी चार चाँद लगा दिए।
