
क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) किसी ने पुराने ब्रश से सजावटी कलाकृतियां बनाईं, तो किसी ने बेकार कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने का रास्ता दिखाया। किसी स्टॉल पर प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन आकर्षण बने, तो कहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की दुनिया ने लोगों का ध्यान खींचा।
मौका था रुड़की के शेफील्ड स्कूल में आयोजित कौशल बोध मेले का, जहां विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, हुनर और उद्यमशीलता से यह साबित किया कि सीखने की कोई सीमा नहीं होती।
मेले में विद्यार्थियों ने केवल अपने बनाए उत्पादों का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि उन्हें तैयार करने के पीछे छिपी सोच, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी अपनी समझ का परिचय दिया।
आत्मनिर्भर भारत, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की अवधारणा को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में रचनात्मकता और व्यावहारिक शिक्षा का अनूठा संगम देखने को मिला।
सोहलपुर रोड स्थित शेफील्ड स्कूल में आयोजित कौशल बोध मेले में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। मेले में बच्चों ने पुराने और बेकार सामान से उपयोगी चीजें बनाकर लोगों को दोबारा इस्तेमाल करने और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
मेले में सजावटी सामान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), पुराने कपड़ों से तैयार उत्पाद, प्राकृतिक शैम्पू, साबुन, हैंडवॉश और सफाई के सामान के स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा चाउमीन, मोमो, चाट सहित कई तरह के पकवानों और मनोरंजक खेलों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
कार्यक्रम के आयोजन में अध्यापिकाओं किरण पाल, दीपाली और चंद्रकला का विशेष योगदान रहा। प्रधानाचार्या डॉ. रुचि रावत, डायरेक्टर दिनेश कुमार शर्मा और चेयरमैन डॉ. राहुल विष्णोई ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। मेले के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने हुनर को पहचानने, नई चीजें बनाने और आत्मनिर्भर बनने की सीख दी गई।



