क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) यूजीसी कानून के विरोध में हरिद्वार जा रहे गाजियाबाद डासना मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज के काफिले को उत्तराखंड पुलिस ने मंगलौर–नारसन बॉर्डर पर रोक लिया।
पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें देवभूमि उत्तराखंड में प्रवेश की अनुमति देने से मना कर दिया। इस दौरान बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पर कड़ी नजर रखी गई।
जानकारी के अनुसार रविवार को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर प्रस्तावित एक दिवसीय सांकेतिक उपवास कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। यह कार्यक्रम यूजीसी कानून के विरोध में आयोजित किया जाना था, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी।
इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था और मंगलौर–नारसन बॉर्डर को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई थी। सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के मद्देनज़र यति नरसिंहानंद गिरी महाराज को हरिद्वार जाने से रोका गया।
वहीं, काफिले को रोके जाने के बाद बॉर्डर पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही। मौके पर पुलिस के आला अधिकारियों ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज और उनके समर्थकों को समझाया।
जिसके बाद कुछ समय बाद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज अपने समर्थकों के साथ नारसन बॉर्डर से वापस लौट गए।
वही फिलहाल, हरिद्वार में प्रस्तावित उपवास कार्यक्रम को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। वही इस मुद्दे पर सियासी और सामाजिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

रुड़की एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि यति नरसिंहानंद गिरी महाराज का हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर प्रस्तावित एक दिवसीय सांकेतिक उपवास कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। जिसके बाद पुलिस-प्रशासन ने उनके काफिले को नारसन बॉर्डर पर समझाकर वापस लौटा दिया हैं।

