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हरिद्वार

सुहागिनों का महापर्व करवा चौथ आज, आपके शहर में कितने बजे होगा चांद का दीदार?

पति की लंबी उम्र के लिए सुहागनियों ने रखा करवा चौथ का व्रत, क्या है व्रत रखने के पीछे की कहानी?

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क्लिक उत्तराखंड:-(ब्यूरो) सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। आज यानी 20 अक्तूबर को सुहागिन महिलाओं का महापर्व करवा चौथ है।

(फाइल फोटो)

कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए सुबह से ही निर्जला व्रत रखती हैं।

(फाइल फोटो)

सुहागिन महिलाएं करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखते हुए शाम को शुभ मुहूर्त में करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं, फिर रात को चंद्रमा के निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत सुबह से लेकर रात को चांद के दर्शन और पूजन के बाद समाप्त हो जाता है।

कितने बजे होगा चांद का दीदार?

आज करवा चौथ को शाम 7 बजकर 24 मिनट पर चांद निकलेगा. यह समय प्रदेश की राजधानी राजधानी देहरादून का है। वही रुड़की, हरिद्वार, ज्वालापुर, भगवानपुर समेत अन्य शहर में चंद्रोदय का समय इससे कुछ पहले या बाद में हो सकता है।

क्या है व्रत रखने के पीछे की कहानी?

करवा चौथ का व्रत अपने पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है. माना जाता है कि जब देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध चल रहा था, तो राक्षस लगातार देवताओं पर भारी पड़ रहे थे। ऐसे में देवताओं की धर्मपत्नी अपने सुहाग को लेकर चिंतित हो गईं. एक देवता की पत्नी ने ब्रह्मा जी के पास जाने की बात कही, तो सभी देवताओं की धर्मपत्नी सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी के पास पहुंच गई. यहां ब्रह्मा जी ने उन्हें निर्जल व्रत रखने का सुझाव दिया. इसके बाद देवताओं की धर्मपत्नियों ने यह व्रत रखा और देवताओं की रक्षा हुई।

इसके बाद करवा चौथ व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है। इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश के साथ शिव-पार्वती और चंद्र देव की पूजा करती हैं. स्थानीय मंदिरों में भी भजन-कीर्तन किया जाता है और महिलाएं एकत्रित होकर धार्मिक माहौल के बीच अपना पूरा दिन व्यतीत करती हैं. कथा सुनने के बाद महिलाएं वापस अपने घर लौटी हैं और चांद का दीदार होने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं।

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