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सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दुसी साबरी ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर उर्स की मुख्य रस्मो की दी जानकारी

चांद दिखाई देने पर मेहंदी डोरी की रस्म के साथ उर्स का होगा आगाज.....(देखिए वीडियो)

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क्लिक उत्तराखंड:-(बुरहान राजपूत) विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक के 757 वे सालाना उर्स का आगाज मेहंदी डोरी की रस्म के साथ शुरू हो जाएगा। उर्स/मेले की तैयारियो के बीच दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दूसी साबरी ने प्रेस- कॉन्फ्रेंस कर दरगाह में होने वाली रस्मो की जानकारी दी।

उर्स की मुख्य रस्मो की जानकारी देते हुए सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दूसी साबरी

इस दौरान उन्होंने कहा कि चांद दिखाई देने पर मेहंदी डोरी की रस्म के साथ साबिर पाक के उर्स के सालाना उर्स का आगाज हो जाएगा। उर्स में 800 सालों से बड़े बुजुर्गों द्वारा जो रस्मुआत की जा रही हैं उसको पूरा किया जाता है।

दरगाह साबिर पाक रह०अलैहि०(फोटो)

दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दुशी साबरी ने पुश्तैनी कोठी पर प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर जानकारी देते हुए बताया कि दरगाह साबिर पाक का 757वे उर्स का आगाज चांद दिखाई देने के बाद मुख्य रस्म मेंहदी डोरी के साथ शुरू हो जाएगा। बरेली शरीफ से पैदल झंडा लेकर आया काफिला कल कलियर शरीफ पहुंच जाएगा। जिसके बाद परचम कुशाई की रस्म अदा की जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए

उन्होंने बताया कि उर्स में 800 सालों से बड़े बुजुर्गों द्वारा जो रस्मुआत की जा रही हैं उसको पूरा किया जाता है। उर्स में 11 रब्बी अव्वल से लेकर 14 रब्बी अव्वल तक अहम तारीखें होगी। उर्स में छोटी और बड़ी रोशनी, और अंत में कुल शरीफ़ तथा गुस्ल शरीफ़ होता हैं। उर्स में शामिल होने के लिए देशभर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में जायरीन कलियर पहुंचते हैं और दरगाह में खिराज ए अकीदत पेश कर देश और कौम की सलामती की दुआ मांगते हैं। इस दौरान दरगाह में कुरान खानी, खत्म शरीफ, महफिल ए मिलाद के साथ ही इबादतों का दौर चलता रहता है।

मेंहदी डोरी सज्जादानशीन के कदीमी घर से अल्लाह हु अकबर की सदाओं के साथ दरगाह शरीफ पहुंचती हैं…..सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दूसी साबरी

दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज कुद्दूसी साबरी ने बताया कि मेहदी डोरी की रस्म में शिरकत करने वाले जायरीन दूर दराज से पिरान कलियर पहुंचते हैं मेंहदी डोरी शाह अब्दुल रहीम के समय से कदीमी घर से अल्लाह हु अकबर की सदाओं के साथ दरगाह शरीफ आती हैं। जहां पर मेहदी डोरी की रस्म को अदा किया जाता है। इसके बाद सालाना उर्स का विधिवत आगाज होता है।

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